जीवन परिचय रामधारी सिंह दिनकर का जन्म सन 1908 में बिहार के मुंगेर जिले के अंतर्गत सिमरिया घाट नामक ग्राम में हुआ था उन्होंने मोकामा घाट से मैट्रिक तथा पटना विश्वविद्यालय से B.A ऑनर्स किया था बाल्यावस्था में ही उन्होंने अपने साहित्य सर्जन के प्रतिभा का परिचय दे दिया था जब वह मेडिकल क्ष में पढ़ते थे तभी उन्होंने वीरबाला नामक काव्य लिख लिया था मैट्रिक में पढ़ते समय है उनका काव्य प्रकाशित हो गया था वर्ष 1928 से 29 मैं उन्होंने साहित्य सर्जन के क्षेत्र में विकास किया था
बीबीए ऑनर्स करने के बाद दिनकर जी 1 वर्ष तक मोकामा घाट के हाई स्कूल में प्रधानाचार्य रहे थे सन 1934 ईस्वी में वह सरकारी नौकरी में आए तथा सन् 1934 में ही ब्रिटिश सरकार के युद्ध प्रचार विभाग में उप निदेशक नियुक्त किए गए थे 1952 में भारत के राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया था जाओ सन 1962 ईस्वी तक रहे सन 1963 ईस्वी में वह भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त किए गए थे दिनकर जी ने भारत सरकार जी की हिंदी समिति के सलाहकार और आकाशवाणी के निर्देशक के रूप में भी कार्य किया था
दिनकर जी के साहित्यिक प्रतिभा को सम्मान देते हुए भारत के राष्ट्रपति ने सन 1959 ईस्वी में इनको पदम भूषण की उपाधि से अलंकृत किया इन्हें साहित्य अकैडमी का पुरस्कार भी मिला ₹100000 के ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी इन को पुरस्कृत किया गया हिंदी का यह महान साहित्यकार सन 1974 ईस्वी में असार संसार से विदा हो गए थे
रामधारी सिंह दिनकर ने एक कवि के रूप में अपेक्षाकृत अधिक ख्याति प्राप्त की थी यद्यपि उनका गद और पद के विभिन्न विधवा पर समान अधिकार था गद्य के क्षेत्र में वह एक श्रेष्ठ निबंधकार आलोचक एवं विचारक के रूप में हिंदी साहित्य जगत में विख्यात है गद्य के क्षेत्र में उन्होंने राष्ट्रीय भावना पर आधारित प्रचार साहित्य की रचना की इन्हें अपने देश एवं संस्कृति से प्रबल अनुराग भावनाओं पर आधारित सर्वश्रेष्ठ कृतियां हैं इनके आलोचनात्मक ग्रंथों में भारतीय एवं समीक्षा सिद्धांतों का सुंदर ढंग से विवेचन हुआ है राष्ट्रीय भावनाओं पर आधारित हृदयस्पर्शी कविताएं लिखने का कारण है राष्ट्र कवि के रूप में विख्यात हुए थे
कृतियां रामधारी सिंह दिनकर जी की प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित हैं
निबंध संग्रह मिट्टी की ओर अर्धनारीश्वर रेती के फूल तथा उजली आग
संस्कृति ग्रंथ संस्कृति के चार अध्याय भारतीय संस्कृति के एकता आदि है
आलोचना ग्रंथ शुद्ध कविता की खोज
काव्य ग्रंथ रेणुका हुंकार रामधनी रूपवती कुरुक्षेत्र रश्मिरथी उर्वशी परशुराम की प्रतीक्षा आदि हैं
भाषा शैली दिनकर जी की भाषा शैली बड़ी ही प्रभावपूर्ण है उनकी भाषा शैली में निम्नलिखित गुण दिखाई देते थे
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